सिद्ध वाजीकरण चूर्ण




एक ऐसा योग जो आप को 
लोह पुरुष बनाता है।

कमजोरी के लिए :सिद्ध महाराजा योग लगातार उपयोग करे शरीर की हर कमजोरी दूर होगी।।


👉केसर, शिलाजीत, सालम पंजा, सालम मिश्री, मकरध्वज, विदारीकंद, सफेद मूसली, काली मूसली युक्त

👉सेवन विधि:1चम्मच चुर्ण,1 capsul High Power खाने से 30 मिनट बाद ताजे पानी से सेवन कर 200 ग्राम दूध का सेवन करे।

नोट करे: high power capsule 24 घंटे में एक बार ही लेना है

सिद्ध बाजीकरण योग घटक

नोटः- कृपया किसी वैद्य की देख रेख में यह नुस्खा तैयार करे कुछ जड़ी बूटियों को शुद्ध करना होता है।

●सफेद मूसली -250 ग्राम
●कीकर फली -100 ग्राम (बीज रहित)
●अश्वगंधा -100 ग्राम
●सतावरी-100 ग्राम
●गोखरू(शुद्ध करे)-100 ग्राम
●जयफल -100 ग्रा 
●जामुन - 100 ग्राम
 की गुठली
●कौंच के (शुद्ध करे) - 100ग्राम
  बीज के चूर्ण
●तालमखाना (शुद्ध करे)-50 ग्राम
●गिलोय चुर्ण-50 ग्राम
●सफेद जीरा-50ग्राम
●सेमल का चूर्ण -50ग्राम
●बबूल गोंद-50 ग्राम
●4 मगज-50 ग्राम
●सालममिश्री-50ग्राम
●सालम पंजा-50ग्राम
● कीड़ा जड़ी 50 ग्राम


सोना भस्म,नागकेसर, शिलाजीत और लोहभस्म के साथ 5 और जडी बुटी का मिश्रण को मिलाकर चुर्ण बनाया जाता है।
सेवन विधि-  
 बादाम ,काजू, मुनक्का और छुहारा युक्त 300 ग्राम दूध के साथ सुबह से-शाम 1-1चम्मच करे इस्तेमाल।

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   सिद्ध बाजीकरण कल्पचुर्ण के फ़ायदे

★ बाजीकरण कल्पचुर्ण के प्रयोग से शुक्रानुओ में वृद्धि होती है इसका 90 दिन प्रयोग करें। इसको खाने से संतान की प्राप्ति हो सकती है।

★ यह योग 20 से 30 मिनट तक timing में ले जाता है।

★सिद्ध बाजीकरण शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

 ★यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है। 

★इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।

★धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।

 ★यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है। 

★यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।

★दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।

★यह औरतों के संभोग करने की क्षमता को बढाता है. इसके इलावा शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण पुरुषों की कामेक्षा बढाने के लिए भी असरदायक है. इन्फर्टिलिटी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, थकान, कमजोरी, लो स्पर्म काउंट और यूरिन की समस्या को दूर करने के लिए लाभकारी है।


परहेज :

1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

5. ओषधि सेवन के आगे-पीछे कम से कम दो घंटे कुछ न खाएं। खाली पेट सेवन से यह मतलब है।

★★★

सावधानी-

इसका उपचार करते समय लगभग 4-5 दिन तक स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए।

रात को सोते समय पानी में किशमिश के 6-7 दाने भिगोकर सुबह नाश्ते के समय पानी के साथ ही खा लें।

काले चनों का सूप बनाकर पिएं और उनको उबालकर खाना भी लाभकारी होता है। 

अगर खाना चाहो तो बादाम की 8-10 गिरियों को भी खा सकते हैं।

मन को एकदम गलत विचारों से दूर रखें।


        गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।

ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है! वीर्य गाड़ा हो sex timing को कुदरती बढ़ावा देगा।
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